गर्भ संस्कार
गर्भ चालीसा
गर्भ चालीसा चालीस चौपाइयों का एक भक्ति-पाठ है जिसे कई परिवार गर्भावस्था के दौरान माँ और शिशु के मंगल के लिए पढ़ते हैं। ‘चालीसा’ शब्द ‘चालीस’ से बना है — यानी चालीस पंक्तियों वाली प्रार्थना।
गर्भ चालीसा क्या है?
जैसे हनुमान चालीसा हनुमान जी की स्तुति है, वैसे ही गर्भ चालीसा गर्भ में पल रहे शिशु और माँ की रक्षा, स्वास्थ्य और अच्छे संस्कारों की प्रार्थना है। इसमें आमतौर पर गर्भ के महीनों, शिशु के विकास और ईश्वर से आशीर्वाद की भावना होती है।
गर्भ संस्कार में महत्व
गर्भ संस्कार की मान्यता है कि माँ जो सुनती, पढ़ती और महसूस करती है, उसका प्रभाव शिशु पर पड़ता है। नियमित, शांत भाव से किया गया पाठ माँ के मन को स्थिर करता है और परिवार को एक सुंदर दैनिक नियम देता है।
पाठ कब और कैसे करें
सुबह स्नान के बाद या शाम को दीपक जलाकर, आराम से बैठकर पाठ करें। आवाज़ धीमी और मधुर रखें। एक हाथ पेट पर रखकर शिशु से जुड़ाव महसूस करें। थकान हो तो लेटकर सुनना भी ठीक है।
किसके साथ जोड़ें
पाठ के बाद एक छोटी कहानी, थोड़ा गर्भ संवाद (शिशु से बात) और अंत में सर्वे भवन्तु सुखिनः शांति मंत्र — यह एक पूरी, 15 मिनट की शाम की दिनचर्या बन जाती है।
पाठ का मूल पाठ
गर्भ चालीसा के कई संस्करण प्रचलित हैं और उनमें से अनेक आधुनिक रचनाएँ हैं जिनके लेखक हैं। इसलिए हम यहाँ कोई संस्करण नकल करके नहीं छाप रहे। अपने परिवार या गुरु द्वारा दिया गया संस्करण पढ़ें। प्रामाणिक, कॉपीराइट-मुक्त पाठ उपलब्ध होने पर हम उसे यहाँ जोड़ेंगे।