गर्भ संस्कार मंत्र
गायत्री मंत्र
मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
अर्थ
हम उस दिव्य, तेजस्वी सूर्य-प्रकाश का ध्यान करते हैं जो सबके योग्य है। वह प्रकाश हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर प्रेरित करे।
गर्भ संस्कार में महत्व
गायत्री मंत्र बुद्धि और विवेक की प्रार्थना है। बहुत से परिवार गर्भावस्था में इसे इस भावना से जपते हैं कि शिशु में अच्छे विचार और स्पष्ट बुद्धि आए।
कब और कैसे जपें
परंपरा से इसे सूर्योदय के समय जपा जाता है। 3, 11 या 108 बार — जितना सहज लगे। धीमी, कोमल आवाज़ में, शिशु पर ध्यान रखते हुए।