गर्भ संस्कार मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र

मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ फल बेल से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही हम भय और बंधन से मुक्त हों।

गर्भ संस्कार में महत्व

यह स्वास्थ्य, सुरक्षा और निर्भयता का मंत्र है। गर्भावस्था में बहुत से परिवार माँ और शिशु की कुशलता के लिए इसका पाठ करते हैं।

कब और कैसे जपें

सुबह या शाम, शांत स्थान पर बैठकर 11 या 108 बार। परिवार के सदस्य भी माँ के लिए इसका जाप कर सकते हैं।

और मंत्र

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अर्थ सामान्य समझ के लिए हैं। मंत्र-जाप आध्यात्मिक अभ्यास है, चिकित्सा नहीं।