गर्भ संस्कार मंत्र
ॐ (ओम्) का जाप
मंत्र
ॐ
अर्थ
ॐ को सृष्टि की मूल ध्वनि माना गया है। इसमें तीन ध्वनियाँ हैं — अ, उ और म — और अंत में एक शांत मौन।
गर्भ संस्कार में महत्व
ॐ का धीमा उच्चारण साँस को लंबा करता है और मन को स्थिर करता है। गर्भ संस्कार की परंपरा में माना जाता है कि माँ की शांत, गूँजती आवाज़ शिशु तक एक सुखद कंपन के रूप में पहुँचती है।
कब और कैसे जपें
सुबह या शाम की कहानी से पहले आराम से बैठें। गहरी साँस लें और छोड़ते समय धीरे-धीरे ‘ओ…म्’ बोलें। 5 से 11 बार पर्याप्त है। साँस फूले तो रुक जाएँ — गिनती से ज़्यादा आराम ज़रूरी है।